संगीत एक तपस्या है – जौहर अली, चिन्मय विद्यालय में हुआ संगीतमय कार्यक्रम

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संगीत एक धर्म है। यह हमें कठीन तपस्या व साधना से प्राप्त होती है। उक्त बातें उस्ताद जौहर अली वॉयलीन वादक ने स्पीक मैके के सौजन्य से चिन्मय विद्यालय के तपोवन सभागार में बच्चों कों संबोधित करते हुए कही।

     संगीतमय कार्यक्रम का शुभारंभ चिन्मय मिशन की आचार्या स्वामिनी संयुक्तानंद, अध्यक्ष विश्वरुप मुखोपाध्याय, सचिव महेश त्रिपाठी, प्राचार्य डॉ अशोक सिंह, उप-प्राचार्य, अशोक कुमार झा ने मंत्रोच्चारण के साथ दीप प्रज्जवलीत कर किया।

जौहरी अली ने अपने वायलीन के धुन पर ‘‘रघुपति राघव राजा राम . . . .’’ से सभी को भाव विभोर कर दिया। उनका साथ तबला पर अनुप घोष ने दिया। उन्होंने बच्चों के कई प्रश्नों का उत्तर दिया। साथ हीं कई संगीत के गुण बच्चों को सिखाये।     जौहर अली एवं अनुप घोष के जुगलबंदी पर बच्चों ने खुब आनंद उठाया। जौहर अली ने संगीत का जीवन में सबसे महत्वपूर्ण बताया। ज्ञात हो की जौहर अली उस्ताद गोहर अली खान के पूत्र हैं। वे पटियाला व रामपूर घराना से ताल्लुक रखते हैं।में हुआ

     जौहर अली ने अपने वायलीन के धुन पर मुबंई आर्टस, संगीत नाटक एकेडमी भूनेश्वर, साहित्य कला परिषद नई दिल्ली, कोर्नाक ज्ञानकला परिषद, ताल महोत्सव, आगरा, स्पीक मैंके, उनेस्को में पेरिस में देश का प्रतिनिधित्व किया है अपनी विशेष छाप छोड़ी। उन्होंने ढ़ाका, चीन, इंडोनासिया, सिंगापुर, जर्मनी, नार्वे, स्वीटजरलैंड, वैल्जीयम, यु,ए,ई, युनाइटेड किंगडम, कुवैत, मॉरिसस, अस्ट्रेलिया, इत्यादी देशों में जाकर भारतीय संस्कृति व संगीत की विशेष छाप छोड़ी।

     कार्यक्रम में आचार्या स्वामिनी संयुक्तानंद, अध्यक्ष विश्वरुप मुखोपाध्याय, सचिव महेश त्रिपाठी, प्राचार्य डॉ अशोक सिंह, उप-प्राचार्य, अशोक कुमार झा ने प्रतीक चिन्ह भेंट कर उन्हें सम्मानित किया।

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