बड़े घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए बैंक कर्मियों व आम जनता की गाढ़ी कमाई को लूटा जा रहा है: दास

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यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के आह्वान पर आहूत दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के प्रथम दिन  भारत के 10 लाख बैंक कर्मियों के साथ-साथ चास-बोकारो के भी सभी बैंककर्मी पूर्णरूपेण हड़ताल पर रहे। फलस्वरूप यहां का बैंकिंग व्यवसाय पूर्णतया ठप रहा। सरकारी क्षेत्र के सभी बैंकों में ताला लटक रहा था। बैंक के अधिकारीगण एवं कर्मचारीगण अपने-अपने बैंकों के समक्ष बैनर टांगकर गेट के सामने नारेबाजी कर रहे थे। इसके अलावा निजी क्षेत्र के बैंकों के भी शटर बंद देखे गये। इस हड़ताल की सफलता के लिए न्थ्ठन् के नेताओं के द्वारा सभी बैंककर्मियों को बधाई दी गई। साथ ही आम जनता के सहयोग के प्रति भी आभार व्यक्त किया गया। इस हड़ताल के माध्यम से जहां बैंक कर्मियों ने अपनी चट्टानी एकता को प्रदर्शित किया वहीं भारत सरकार को भी यह चेतावनी दी गई कि यदि सम्मानजनक वेतन समझौता जल्द नहीं किया जाता है, जनविरोधी बैंकिंग तथा श्रम सुधार कानूनों तथा श्रम संगठन अधिकारों में दखल देने के सरकारी कदम को वापस नहीं लिया गया, बैंक के स्थायी कार्यों में आउटसोर्सिंग को बंद नहीं किया गया, सभी संवर्गों में पर्याप्त बहाली नहीं की गई, जान -बूझकर ऋण नहीं चुकाने वालों के विरूद्ध कठोर फौजदारी कानून नहीं बनाया गया, मजदूर एवं आमजन विरोधी रवैयों में बदलाव नहीं लाया गया, बेरोजगारी पर रोक नहीं लगाया गया, बैंकों में आम ग्राहको पर बढ़े हुए सेवा शुल्क को वापस नहीं लिया गया, जमा राशि पर ब्याज दर नहीं बढ़ाया गया तो यह लड़ाई और तीव्र होगी एवं बैंक कर्मी इसे अपने अंतिम दम तक लड़ने को बाध्य होंगे और इसकी पूरी  जिम्मेवारी भारत सरकार की होगी।

पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाना चाहती है सरकार

 

उल्लेखनीय है कि आज भारत के सभी सरकारी क्षेत्र के बैंक अपने कर्मचारियों की मेहनत से हजारो करोड़ का परिचालन लाभ कमा रही है। लेकिन हमारे द्वारा अर्जित इस लाभ की राशि से हमें वंचित करते हुए इसे पूंजीपति घरानों द्वारा लिये गये ऋण के अशोध्य होने पर उसकी भरपाई के लिए एक साजिश के तहत इन लाभ के पैसों का उपयोग कर रही है। साथ ही तथाकथित बैंकिग कानून संशोधन विधेयक के माध्यम से सरकार बैंकों में आमजनों की जमापूँजी, जो कि पुरे जमापूँजी का लगभग 70 प्रतिशत है, को देशी एवं विदेशी पूँजीबाजार के लिए खोलना चाहती है एवं भारत के आमजनों की कड़ी मेहनत से कमाई राशि को देशी एवं विदेशी पूँजीपति घरानों के हाथ भी सौंपना चाहती है।
आश्चर्य इस बात का है कि वर्त्तमान भारत सरकार अपनी सभी विकास योजनाओं का क्रियान्वयन बैंकों क माध्यम से ही करती है तथा बैंक कर्मियों के मेहनत की प्रधानमंत्री अपने हर उद्बोधन में स्वयं प्रशंसा भी करते हैं किन्तु जब उपयुक्त मुआबजा देने की बात होती है तो वहां कर्मचारियों के हितों पर कुठाराघात ही नहीं किया जाता है बल्कि उन्हें भीख स्वरूप 2 प्रतिशत वेतन बढ़़ोतरी का प्रस्ताव किया जाता है। उक्त बातें जिला संयोजक एस. एन. दास ने कहा। उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल से आमजनों को हुई तात्कालिक कठिनाई के लिए खेद प्रकट करते हुए आमजनों को भी आह्वान किया गया। इस जायज हक की लड़ाई में हमें अपना पुरजोर समर्थन दें। इस हड़ताल को स्थानीय स्तर पर सफल करने में मुख्य रुप से एस एन दास,  राजेश कुमार सिन्हा, धनन्जय कुमार, राघव कुमार सिंह, बिनोद कुमार सिन्हा, राजेश ओझा, विभाष झा, एस0 पी0 सिंह, संजीव रंजन शर्मा,  प्रदीप झा, अवधेश प्रसाद, राजेश श्रीवास्तव, अजित कुमार सिन्हा मनोज कुमार, सुदीप कुमार पांडेय, टिंकू कुमार बाल्मिकी, प्रदीप बेगी, चंदन कुमार, राजीव भारद्वाज, राकेश मिश्रा, एस. एन. ओझा, जितेन्द्र कुमार, जयराम पासवान, अनिल कुमार आदि के अलावे सभी बैंककर्मियों जिसमें महिला साथियों की मौजूदगी सराहनीय रही।

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