चिन्मय विद्यालय में पादुका पूजन के साथ हुआ भजन-कीर्तन

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बोकारो: चिन्मय मिशन के संस्थापक एवं युगान्तर दृष्टा ब्रह्मलीन स्वामी चिन्मयनंद की जयन्ती धूम-धाम से मनाई गई। इस अवसर पर विशेष पूजा अर्चना का आयोजन हुआ। स्थानीय तपोवन सभागार में आयोजित गुरु पादुका पूजा में प्राचार्य डाँ अशोक सिंह, उप-प्राचार्य ए के झा, शिक्षक-शिक्षिका समेत कक्षा छह से बारहवीं के छात्र-छात्राएँ सम्मीलित हुए। गुरु पादुका पूजा चिन्मय मिशन की आचार्या स्वामिनी संयुक्तानंदा के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुई। इस अवसर पर कई भजन कीर्तन भी गाये गए। सभी छात्रों को प्रसाद वितरण भी किया गया।

स्वतन्त्रता संग्राम में थी अग्रणी भूमिका 

स्वामी चिन्मयनंद स्वामी तपोवन महाराज के शिष्य थे। जिनका जन्म 8 मई 1916 को एरनाकुलम, केरल में हुआ था। पहले वे स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाने के बाद पत्रकारिता से जुड़ गये। स्वामी शिवानन्द एवं स्वामी तपोवन महाराज की प्ररेणा से वे अध्यात्म की ओर प्रेरित हुए उनके मार्गदर्शन में ही बोकारो एवं देश के कई हिस्सों में चिन्मय विद्यालयों की स्थापना हुई। वे दो बार चिन्मय विद्यालय बोकारो भी आ चुके हैं। स्वामी जी ने 1953 में चिन्मय मिशन की नींव रखी और वे शिक्षा के माध्यम से समाजसेवा और वेदांत प्रसार के लिए अनवतरत रुप से प्रशंसनीय व सराहनीय कार्य करते रहे थे। आज पूरे विश्व में 250 सौ से अधिक चिन्मय मिशन केन्द्र व 100 से अधिक विभिन्न शिक्षण संस्थाएँ कार्य कर रही है। एवं  देश व विश्व के विकास में अहम भूमिका निभा रही है।

संध्या में हुई विशेष प्रार्थना सभा 

संध्या के समय चिन्मय मिशन, बोकारो में विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन हुआ, जिसमें, चिन्मय मिशन, पूर्वी क्षेत्र के प्रबंधक सह चिन्मय विद्यालय, बोकारो अध्यक्ष विश्वरुप मुखोपाध्याय, प्राचार्य डॉँ अशोक सिंह, उप प्राचार्य एके झा, नरमेन्द्र कुमार, वृजमोहन लाल दास, हरिहर पाडें, गौतम नाग, संजीव सिंह, के साथ-साथ सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने शिरकत की। प्रार्थना सभा में भजन-कीर्तन कार्यक्रम हुआ और स्वामीजी के जीवन पर प्रकाश डाला गया।

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